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Sunday, February 23, 2014

एयरलाइंस क्षेत्र में सरकारी साजिश ,किंगफिशर बेल आउट के दौर में दम तोड़ता किसान ..

पिछले दिनों किंगफिशर एयरलाइंस को तेल कंपनियों ने बकाया राशी के भुगतान न करने के कारण, तेल देना बंद कर दिया और कंपनी को कई उड़ाने रद्द करनी पड़ी..हालत यह है की आज कंपनी पर लगभग ७००० करोड़ रूपये का कर्ज है या दूसरे शब्दों में कहे तो किंगफिशर एयरलाइंस  दिवालिया होने के कगार पर पहुच गयी है..लगभग ७० उड़ाने रोज रद्द हो रही है और कई कम आवाजाही के मार्गों पर कम्पनी ने अपना सञ्चालन स्थगित कर दिया है..अब प्रश्न ये है की, क्या कंपनी रातो रात दिवालिया होने के कगार पर पहुच गयी या प्रबंध तंत्र को पहले से इसकी जानकारी थी और जानबूझ कर कंपनी ने आने वाली परिस्थितियों के लिए जरुरी कदम नहीं उठाये..आखिर घाटे में एयरलाइंस को चलाकर दीवालिया बनाने की करार तक आने देने के पीछे क्या कारण रहे?

क्यूकी व्यापार की दुनिया के बादशाहों में एक विजय माल्या बिना किसी फायदे के ये एयरलाइंस के घाटे का सौदा मोल लेंगे आसानी से गले नहीं उतरता..
अब हम इस दीवालिया कंपनी के मालिक विजय माल्या के बारे में देखें तो अपनी रंगीन मिजाजी और आलिशान पार्टियों पर पानी की तरह पैसा बहाने वाला ये उद्योगपति हर साल खुबसूरत माडलों  के नंगे कैलेंडर बनवाने में करोडो रूपये उडाता है..इसके अलावा व्यापार जगत की ये हस्ती यूनाइटेड ब्रिवरीज नामक कंपनी का मालिक है और भारत में बिकने वाली हर दूसरी बियर इनकी फैक्ट्री से निकलती है..
कई स्टड फार्मो के मालिक विजय माल्या, आई.पी.एल में टीम का मालिकाना हक़ भी रखते हैं और भारत  और विश्व के सर्वाधिक धनी व्यक्तियों में एक गिने जाते हैं..
अभी हाल फ़िलहाल में इनका नया नवअन्वेषण था भारत में फार्मूला वन रेस .इस रेस टीम में इनका मालिकाना हक़ है.. प्रश्न भी यही से उठता है की एयरलाइंस के डूबने का सिलसिला पिछले साल से ही शुरू हो गया था मगर उड़ाने रद्द होने का सिलसिला,तेल कंपनियों का सप्लाई रोकने का फैसला फार्मूला १ के बाद ही क्यों आया..कहीं ऐसा तो नहीं की फार्मूला वन के आयोजन पर माल्या की एयरलाइंस के डूबने से संकट आ सकता था..शायद तकनीकी रूप से रेस हो भी जाती तो माल्या के ऊपर नैतिक दबाव होता..
अब माल्या की कंपनी को कर्जे से उबारने के लिए बेल आउट पैकेज की बात मीडिया और सत्ता के गलियारों में बहुत जोर शोर से उठाई जा रही है..मंत्रियों और बैंको की बैठको का दौर शुरू हो गया, की कैसे अरबो खरबों के मालिक माल्या की आर्थिक सहायता की जाये..थोड़े ही समय में इसके परिणाम भी आने शुरू हो गए, कंपनियों ने बिना बकाया वसूले तेल की सप्लाई शुरू कर दी..किंगफिशर के शेयरों में तेजी आनी शुरू हो गयी और परदे के पीछे मनमोहन जी के सिपहसालारों ने माल्या को मालामाल करने की तरकीबे भिड़ानी शुरू कर दी..शायद माल्या को प्रत्यक्ष रूप से १०-१५ हजार करोड़ की आर्थिक सहायता दे दी जाती मगर आने वाले चुनावों को देखते हुए, शायद कांग्रेस सरकार ने इस फैसले को टाल दिया है क्यूकी अब जनता के हिसाब मांगने की बारी है की सैकड़ो कंपनियों के खरबपति मालिक पर ये मेहरबानी क्यों????
अगर हम इस समस्या के  मूल में जा के देखें तो काफी हद तक ये बातें पूर्वनिर्धारित लग रही है..एक किंगफिशर एयरलाइंस के बंद हो जाने से विजय माल्या की आर्थिक सेहत पर ज्यादा से ज्यादा  उतना ही प्रभाव पड़ेगा जितना साल के अंत में एक बार आय कर कटने से एक मध्यमवर्गीय व्यक्ति पर पड़ता  है..अगर इन परिस्थितियों को व्यापक स्तर पर देखें तो आज इंडियन एयरलाइंस और एयर इंडिया विलय होने के बाद भी  दिवालिया होने के कगार पर है बाकी एयरलाइंस में भी इक्का दुक्का छोड़ दे तो सबकी हालत खस्ता है..एयरलाइंस के किरायों पर कोई विनियमन नहीं है..और सभी जानते हैं की ये सारी परिस्थितियां सरकार द्वारा प्रायोजित गलत नीतियों के कारण उत्पन्न हुई है..यहाँ ध्यान देने योग्य बात ये है  एयरलाइंस  सेक्टर में विदेशी कंपनियों की पैठ अभी तक नहीं बनी है..
ये वही मनमोहन सिंह जी है जिनकी १९९१ में शुरू की गयी नीतियों के कारण आज हमारे घर के तेल,साबुन,टीवी से लेकर कार,पंखा या दैनिक प्रयोग की हर बस्तु बिदेशी हो गयी यहाँ तक की अब सब्जियों को भी बिदेशी हाथो में दिया जा रहा है बेचारा किसान सल्फास खा कर मर रहा रहा है..खैर हिन्दुस्थान में मरता किसान ही है, कोई इटली का  युवराज नहीं इसलिए ये बड़ी बात नहीं हमारे प्रधानमन्त्री  जी के लिए..
जो बात बड़ी है वो ये की तेल से लेकर कार  बेचने वाली बिदेशी कम्पनियाँ अब तक एयरलाइंस  सेक्टर में कब्ज़ा क्यों नहीं कर पाई??यही माननीय मनमोहन जी और सोनिया जी की चिंता का विषय है..विशेषकर यूरोप की कम्पनियाँ हिन्दुस्थान के इस सेक्टर पर नजर गडाए बैठी है.. अब मनमोहन मंडली से अच्छा राजनैतिक सहयोग कही मिलेगा नहीं तो सारी एयरलाइंस को घाटे में दिखा कर बिदेशी एयरलाइंस  को भारत में आने का मौका दिया जाये और इस बाजार पर भी बिदेशी कब्ज़ा..बेशक इन सब के लिए कुछ मेहनताना हर बार की तरह कांग्रेस नेताओं के स्विस अकाउंट में भेज दिया जायेगा..इस संशय को इंडियन एयरलाइंस  के लगातार घाटे और मनमोहन के मंत्रियों की तिहाड़ यात्रा से और भी बल मिलता है..
इन सब के बिच एक सामान्य मध्यमवर्गीय आदमी मनमोहन और सोनिया जी की सरकार के लिए एक स्वयं ही एक उत्पाद बन कर रह गया है जिसका इस्तेमाल फायदे और मूल्य संवर्धन के लिए आवश्यकता अनुसार कर लिया जाता है...नोयडा में किसानो से जमीन ली जाती है औद्योगीकरण और रोजगार के नाम पर पर  वहां विजय माल्या की कारे दौडाई जाती है और राबर्ट वढेरा जैसे खरबपति उस पर दांव लगाते हैं..सिर्फ कुछ गिने चुने खरबपतियों की ऐयाशी  के लिए किसानो से जमीन ले कर रेसिंग ट्रैक बनाया जाता है और किसान भूख के मारे आत्महत्या करता है...अगर अपना हक मांगने लायक जान बची रहती है तो विश्व बैंक और यूरोप की पालतू सरकार गोलियां चलवाकर उनका मुंह बंद कर देती है...हिन्दुस्थान में अगर गरीब किसान या एक मध्यमवर्गीय व्यक्ति  दिवालिया होता है तो उसके सामने आत्महत्या का ही रास्ता होता है मगर विजय माल्या जैसा खरबपति दिवालिया हुआ तो अरबो खरबों ले कर हमारे प्रधनमंत्री जी उसके चौखट पर पहुच जाते हैं.अगर ये बेल आउट हमारे प्रधानमंत्री जी आत्महत्या करते किसानो पर खर्च करते तो मैं यकीन से कह सकता हूँ की हिन्दुस्थान में कोई भी किसान आत्महत्या नहीं करता..शायद ये बेल आउट उस मध्यमवर्गीय रोजगार करने वाले व्यक्ति का भी कुछ भला कर सकता है जिसे रोज महंगाई और पेट्रोल की बढ़ी  कीमतों से जूझना पड़ता है...मगर सामान्य जनता पर महंगाई के  बढे बोझ को सही ठहराने  के लिए मंत्रियों की फ़ौज खड़ी हो जाती है और वही फ़ौज माल्या जैसे उद्योगपतियों के लिए हमारे टैक्स का पैसा पानी की तरह बहाने में एक बार भी विचार नहीं करती..इससे इस आशंका को समर्थन मिलता है वर्तमान सरकार निजी हितों के कुछ गिने चुने भ्रष्ट उद्योगपतियों के साथ गठबंधन कर के खुली लूट कर रही है...

एयरलाइंस  सेक्टर की ये उठापठक भी इसी लूट का हिस्सा है..कोई आश्चर्य नहीं की जैसे इटली के कई बैंको को हिन्दुस्थान में अकस्मात प्रवेश दे दिया गया आने वाले दिनों में सरकारी एयरलाइंस बेच दी जाये , इटली और यूरोप की विमानन कंपनिया भारतीय आकाश पर कब्ज़ा किये बैठी हों और हमारे प्रधनमंत्री जी उदारीकरण से होने वाले फायदे का दिवास्वप्न दिखा रहे हों....

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