Pages

Friday, February 21, 2014

गर्भ निरोधक का खेल

आदरणीय राष्ट्रप्रेमी भाईयों और बहनों

भारत अंग्रेजी दवाओं का Dumping Ground बन गया है इसलिए कुछ दूसरी इसी तरह की चीजें जो दवा क्षेत्र से ही जुडी हैं, और वो है गर्भ निरोधक का | और हमेशा की तरह ये लेख भी परम सम्मानीय भाई राजीव दीक्षित जी के व्याख्यानों पर आधारित है |

गर्भ निरोधक का खेल    


कई विदेशी कंपनियाँ हमारे देश की माताओ ,बहनो को गर्भ निरोधक (Contraceptive) बेचती हैं | कुछ तो गोलियों (Pills) के रूप मे बेचे जाते हैं और इनके अलग अलग नाम हैं | जैसे Norplant, Depo Provera, I-Pill, E-Pill है | ऐसे करके कुछ और अलग अलग नामो से हमारे देश की माताओ ,बहनो को ये गर्भ निरोधक (Contraceptive) बेचे जाते है | और आपको ये जानकर बहुत दुख होगा जिन देशो की ये कंपनियाँ है, ये सब वो अपने देश की माताओं-बहनो को नहीं बेचती है लेकिन भारत मे लाकर धड़ल्ले से बेच रही हैं |  जैसे ये Depo Provera नाम की तकनीक जो इन्होने विकसित की है गर्भ निरोधक के रूप में, ये अमेरिका की एक कंपनी ने विकसित किया है कंपनी का नाम है आबजोन | इस कंपनी को अमेरिका सरकार ने प्रतिबंधित किया हुआ है कि ये डिपो प्रोवेरा नाम की तकनीक को अमेरिका मे नहीं बेच सकती तो कंपनी ने वहाँ नहीं बेचा और अब इसका उत्पादन कर भारत ले आए और भारत सरकार से इन्होने एग्रीमेंट कर लिया और अब ये धड़ल्ले से इसे भारत मे बेच रहे हैं |

ये जो डिपो प्रोवेरा है इसे इंजेक्शन के रूप मे भारत की माताओ-बहनो को दिया जा रहा है और भारत के बड़े बड़े अस्पतालो के डाक्टर इस इंजेक्शन को माताओं बहनो को लगवा रहें है | परिणाम क्या हो रहा है कि ये माताओ, बहनो का जो माहवारी का चक्र (Menstruation Cycle) है इसको पूरा बिगाड़ देता है और उनके युटेरस मे कैंसर कर देता है और माताओ-बहनो की मौत हो जाती है | कई बार तो उन माताओं-बहनो को पता ही नहीं चलता है कि वो किसी डाक्टर के पास गए थे और डाक्टर ने उनको बताया नहीं और डिपो प्रोवेरा का इंजेक्शन लगा दिया | जिससे उनको कैंसर हो गया और उनकी मौत हो गई | ऐसा लाखो माताओ- बहनो के साथ हुआ है और अभी भी हो रहा है |

इसी तरह इन्होने एक NET EN नाम की गर्भ निरोधक तकनीकी लायी है | स्टेरोइड्स के रूप मे ये माताओ-बहनो को दे दिया जाता है या कभी इंजेक्शन के रूप और कभी गोलियों के रूप मे भी दिया जाता है | इससे उनको गर्भपात हो जाता है और उनके जो पीयूष ग्रंथी के हार्मोन्स का सिक्रेसन है उनमे असंतुलन आ जाता है और वो माताएं और बहने बहुत परेशान होती है जिनको ये NET EN दिया जाता है !

इसी तरह से RU 496 नाम की एक तकनीक उन्होने लाई है फिर रुसेल नाम की एक तकनीक है, फिर एक युकेलफ़ नाम की तकनीक है फिर एक Norplant है | फिर एक प्रजननरोधक टीका उन्होने बनाया है जो हमारी माताओ-बहनो के लिए तकलीफ का कारण बनती है फिर उनमे ये बहुत बड़ी तकलीफ ये आती है कि ये जितने भी तरह के गर्भ निरोधक उपाय माताओ-बहनो को दिये जाते हैं उससे उनकी गर्भाशय की मांसपेशिया एक दम ढीली पड़ जाती है और अक्सर उनका मासिक चक्र गड़बड़ा जाता है और मासिक चक्र के दौरान कई माताएं-बहने बेहोश हो जाती है क्योंकि उनके शारीर में बहुत ज्यादा दर्द होता है लेकिन उनको ये मालूम नहीं होता कि उनको जो कोंट्रासेप्टिव दिया गया उसके कारण से ये हुआ है और इस तरह से हजारो करोड़ रुपए की लूट हर साल विदेशी कंपनियो द्वारा ये खतरनाक कोंट्रासेप्टिव बेच कर की जाती हैं !

कंडोम
अभी पिछले कुछ सालों से कंडोम का व्यापार विदेशी कंपनियो के माध्यम से हमारे देश में बहुत तेजी से बढ़ा है और इसका प्रचार होना चाहिए इसके लिए AIDS का बहाना है | और आपको एक पते की बात बताऊँ, AIDS कोई बीमारी नहीं है बल्कि ये एक लक्षण होता है और इसमें हमारे शारीर की प्रतिरोधक या प्रतिकारक क्षमता कम हो जाती है और उसे वापस पाया जा सकता है | और इसी AIDS का बहाना लेकर टीवी मे, अखबारो मे, मैगजीनो मे एक ही बात का विज्ञापन कर रहे है कि आप कुछ भी करो कंडोम का इस्तेमाल करो | ये नहीं बताते कि आप अपने ऊपर सयम रखो, ये नहीं बताते कि अपने पति और पत्नी के साथ वफादारी निभाओ | वो बताते है कुछ भी करो अर्थात किसी की भी माँ, बहन, बेटी के साथ कुछ भी करो, बस कंडोम का इस्तेमाल करो और इसका परिणाम ये हुआ है मात्र 15 साल मे इस देश मे 100 करोड़ कंडोम हर साल बिकने लगे हैं | 15 साल पहले इनकी संख्या हजारो मे भी नहीं थी और इन कंपनियो का टारगेट ये है कि ये 100 करोड़ कंडोम एक साल नहीं एक दिन मे बिकने चाहिए | एड्स का शोर मचा कर बहुराष्ट्रीय कम्पनियों (साथ ही साथ देशी कम्पनियों ने भी) ने कण्डोम का बाजार खड़ा किया है और कई सौ करोड़ रूपये का सलाना मुनाफा कमा रही हैं |

परन्तु बहुराष्ट्रीय कम्पनियों की शह पर एड्स को रोकने के जिन तरीकों को ज्यादा प्रचारित किया जा रहा है उनमें हैं सुरक्षित सम्भोग और कण्डोम का प्रयोग। देश में यौन सम्बन्धों के लायक सिर्फ 30% लोग ही हैं जो अधिकतर अपने जीवन साथी के अलावा किसी अन्य से यौन सम्पर्क नहीं बनाते | दूसरी तरफ बच्चे से लेकर बूढे तक इन्जेक्शन की सुई का प्रयोग करते हैं अतः इस रास्ते एड्स फैलने की सम्भावनाएं बहुत अधिक हैं | इसके अलावा रक्तदान द्वारा इस बीमारी का होना लगभग तय है | और अभी भी हमारे देश में 50 प्रतिशत मामलों में रक्त बिना जांच के ही चढा दिया जाता हैं | भारत में विशेष स्थितियो में उपर्युक्त दोनों तरीकों से एड्स प्रसार की ज्यादा सम्भावनाओं को नजर अंदाज कर यौन सम्पर्को को ही मुख्य जिम्मेदार मानना पश्चिम का प्रभाव और कण्डोम निर्माता कम्पनियों की पहुंच का ही परिणाम है | विलासी उपभोक्तावादी संस्कृति के इस दौर में कण्डोम संस्कृति और उस का प्रचार विवाहोतर यौन सम्बन्धों को बढ़ाकर इस बीमारी की जड को हरा ही बनायेंगे |

हमारे देश में लगभग 40 करोड़ रूपये का कण्डोम देशी कम्पनियाँ और इतने ही मूल्य का कण्डोम विदेशी कम्पनियाँ बेच रही हैं | विदेशी कण्डोमों के बारे में यह बात खास तौर से उल्लेखनीय है कि 1982 से ही सरकार ने इनके आयात पर से सीमा शुल्क समाप्त कर दिया था और उस फैसले के बाद ही देश का बाजार विदेशी कण्डोमों से भर गया | करीब 25-30 एजेन्सियाँ जापान, कोरिया, ताइवान, हांगकांग, थाइलैण्ड वगैरह से कण्डोम थोक के भाव मंगाती और बेचती हैं | करीब 20 देशी व 80 विदेशी ब्रांडो अर्थात 100 से ज्यादा ब्रांडो में 100 करोड़ से ज्यादा कण्डोम सालाना बिक रहे हैं |

”मुक्त यौन” की संस्कृति और उसे कण्डोम द्वारा सुरक्षा कवच पहना कर प्रचारित करने से युवाओं की उर्जा का प्रवाह किस दिशा में मोड दिया गया है यह अलग से एक बहुत ही गम्भीर सवाल है | अपनी भारत सरकार और ये विदेशी कंपनिया AIDS रोकने से ज्यादा कंडोम की बिक्री बढ़ाना चाहती है | इसके लिए देश के युवाओ को बहलाया-फुसलाया जा रहा है ताकि विवाह से पहले ही किसी भी लड़की के साथ सम्बन्ध स्थापित करे और एक पत्नी से अधिक औरतों से संबंध बनाए जिससे समाज और परिवार खत्म हो जाये |

जय हिंद
राजीव दीक्षित

Help us Donate More

We give free Cd's of Rajiv Dixit Ji from funds we earn from Google ads on this blog. More we earn, More we distribute Free. Help us Donate More, Visit blog regularly and do your bit.