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Saturday, August 9, 2014

काश मैं विरोध करता

अमित सड़क से गुजर रहा था, उसने एक लड़की की चीख पुकार सुनी, वह कुछ षण वहां रुका, देखा और ये सोचकर आगे बढ़ गया की उसकी बहन तो शहर में है ही नही, तो बेकार किसी और के झगडे में क्यूँ पड़ना।
शाम तक खबर आ गई की तुम्हारी बहन का अपहरण करके हत्या कर दी गयी। और पता करने पर पता चला की ये उसी जगह की घटना है जहाँ वो सुबह चीख सुनी थी।

अब वो ये सोचने लगा की अगर मुझे पता होता की वो मेरी बहन है तो मैं उसे बचा लेता।
फिर ये सोचा की वहां के लोगों की आत्मा कितनी मर गयी होगी जो उन्होंने मेरी बहन को नही बचाया।

अब ये सवाल उसके खुद के ऊपर था की जब उसने दुसरे की बहन को नही बचाया तो उसकी बहन को कोई कोई दूसरा क्यूँ बचाएगा।

उसकी बहन अब वापस नही आ सकती थी लेकिन उसने अपनी बहन से वादा किया की अब से हर अबला की मदद करेगा बिना ये सोचे की वो उसका कोई अपना है या नही।

दोस्तों हम और हमारे परिवार के लोग हर वक़्त एक दुसरे के साथ नही रह पाते, सबके अपने अपने कार्य क्षेत्र हैं। आपकी माँ बहन बेटी भी घर से बाहर जाती हैं, नौकरी पर , दफ्तर में, स्कूल कालेज में व् अन्य घरेलु कारणों से।
अब उनके साथ कोई बदतमीजी करे, बदसलूकी करे तो क्या आप नही चाहेंगे की उनकी रक्षा हो?

ऐसे ही अगर हम सब अपनी बहन के साथ साथ किसी अन्य की बहन की रक्षा करेंगे तो सबकी बहन की रक्षा होगी।

आप भी अमित की तरह अपनी बहन के साथ गलत होने का इंतज़ार करेंगे या फिर आज से ये प्रण लेंगे की किसी की भी बहन के साथ गलत नही होने देंगे। अपनी बहन की तरह उसकी भी रक्षा करेंगे चाहे इसमें अपनी जान ही क्यूँ न देनी पड़े। कम से कम आपका जीवन किसी सार्थक कार्य में सफल होगा।

आज हर बहन अपने भाई को ये कहानी सुनाये या भेजे और उससे यह वचन ले की वो सबकी रक्षा करेगा।

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